Vastu tips

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कुछ जरुरी वास्तु टिप्स—हमारे रहन सहन में वास्तु शास्त्र का विशेष महत्व है। कई बार हम सभी प्रकार की उपलब्धियों के बावजूद अपने रोजमर्रा की सामान्य जीवन शैली में दुखी और खिन्न रहते हैं। वास्तु दोष मूलतः हमारे रहन सहन की प्रणाली से उत्पन्न होता है। प्राचीन काल में वास्तु शास्त्री ही मकान की बुनियाद रखने से पहले आमंत्रित किए जाते थे और उनकी सलाह पर ही घर के मुख्य द्वार रसोईघर, शयन कक्ष, अध्ययन शाला और पूजा गृह आदि का निर्णय लिया जाता था।—-अपने घर में साल में एक दो-बार हवन करें|—–घर में अधिक कबाड़ इकठ्ठा न करें|—–शाम के समय एक बार पूरे घर की लाइट जरूर जलाएं|इस समय घर में लक्ष्मी का प्रवेश होता है|—–सुबह-शाम सामूहिक आरती करें—–महीने में एक या दो बार उपवास करें|—–घर में हमेशा चन्दन और कपूर की खुशबु का प्रयोग करें|—–जो व्यक्ति श्रेष्ट धन की इच्छा रखते हैं व रात्रि में सताईस हकिक पत्थर लेकर उसके ऊपर लक्ष्मी का चित्र स्थापित करें,तो निश्चय ही उसके घर में अधिक उन्नति होती है|—–यदि ग्यारह हकिक पथेर लेकर किसी मंदिर में चदा दें|कहें की अमुक कार्य में विजय होना चाहता हूँ तो निश्चय ही उस कार्य में विजय प्राप्त होती है|—-वास्तु में दिशाओं का बड़ा महत्व है इसलिए घर में कोई भी सामान रखने से पहले यह जान लेना आवश्यक है कि उस सामान को किस दिशा में रखा जाना चाहिए।—-मकान के पूर्व/पूर्वोत्तर दिशा में छोटे झाड़ीनुमा पौधे लगाएं। इससे मकान में रहने वाले परिवार को सूर्य के विकिरण के लाभ अधिकतम मिलते हैं।—स्टडी टेबल के पास पेंडुलम घड़ी लगाने से ज्यादा ध्यान लगता है।,सिर्फ वर्गाकार/आयताकार भूमि का टुकड़ा ही खरीदें।, कीचन में नीले रंग का प्रयोग न करें।, बेडरूम में पूजा का स्थान नहीं बनाएं।, मकान के —-प्रवेश द्वार के पास कोई कांटेदार पौधा न लगाएं।—शयनकक्ष में झाडू न रखें। तेल का कनस्तर, अँगीठी आदि न रखें। व्यर्थ की चिंता बनी रहेगी। यदि कष्ट हो रहा है तो तकिए के नीचे लाल चंदन रख कर सोएँ।—दुकान में मन नहीं लगता तो श्वेत गणपति की मूर्ति विधिवत पूजा करके मुख्य द्वार के आगे और पीछे स्थापित करना चाहिए।—मुख्य दरवाजे के खोलने बंद करने में कोई आवाज नहीं होनी चाहिए।, खिड़कियां अधिकांशतः पूर्व/उत्तर की दीवारों पर बनानी चाहिए।—घर में टूटा शीशा कतई न रहने दें।, किसी भी फ्लैट में उत्तर और पूर्व की ओर छूटा हुआ स्थान दक्षिण और पश्चिम में छूटे हुए स्थान से अधिक होना चाहिए।–मकान पर किसी भी पेड़ की छाया नहीं गिरनी चाहिए।, भूमि का स्लोप पश्चिम से पूर्व या दक्षिण से उत्तर होनी चाहिए।–उत्तर अथवा पूर्व में बड़ा खुला स्थान नाम, धन और प्रसिद्धि का माध्यम होता है। अपने मकान, फार्म हाउस कॉलोनी के पार्क फैक्टरी के उत्तर-पूर्व, पूर्व या उत्तरी भाग में शांत भाव से बैठना या नंगे पैर धीमे-धीमे टहलना सोया भाग्य जगा देता है।—दक्षिण-पश्चिम में अधिक खुला स्थान घर के पुरूष सदस्यों के लिए अशुभ होता है, उद्योग धंधों में यह वित्तीय हानि और भागीदारों में झगड़े का कारण बनता है।—घर या कारखाने का उत्तर-पूर्व (ईशान) भाग बंद होने पर ईश्वर के आशीर्वाद का प्रवाह उन स्थानों तक नहीं पहुंच पाता। इसके कारण परिवार में तनाव, झगड़े आदि पनपते हैं और परिजनों की उन्नति विशेषकर गृह स्वामी के बच्चों की उन्नति अवरूद्ध हो जाती है। ईशान में शौचालय या अग्नि स्थान होना वित्तीय हानि का प्रमुख कारण है ।—सुबह जब उठते हैं तो शरीर के एक हिस्से में सबसे अधिक चुंबकीय और विद्युतीय शक्ति होती है, इसलिए शरीर के उस हिस्से का पृथ्वी से स्पर्श करा कर पंच तत्वों की शक्तियों को संतुलित किया जाता है।—–बैठक के कमरे में द्वार के सामने की दीवार पर दो सूरजमुखी के या ट्यूलिप के फूलों का चित्र लगाएँ।—–घर के बाहर के बगीचे में दक्षिण-पश्चिम के कोने को सदैव रोशन रखें।—–घर के अंदर दरवाजे के सामने कचरे का ‍डिब्बा न रखें।—–घर के किसी भी कोने में अथवा मध्य में जूते-चप्पल (मृत चर्म) न रखें।—–जूतों के रखने का स्थान घर के प्रमुख व्यक्ति के कद का एक चौथाई हो, उदाहरण के तौर पर 6 फुट के व्यक्ति (घर का प्रमुख) के घर में जूते-चप्पल रखने का स्थल डेढ़ फुट से ऊँचा न हो।—सबसे पहले उठकर हमें इस ब्रह्मांड के संचालक परमपिता परमेश्वर का कुछ पल ध्यान करना चाहिए। उसके बाद जो स्वर चल रहा है, उसी हिस्से की हथेली को देखें, कुछ देर तक चेहरे का उस हथेली से स्पर्श करें, उसे सहलाएं। उसके बाद जमीन पर आप उसी पैर को पहले रखें, जिसकी तरफ का स्वर चल रहा हो। इससे चेहरे पर चमक सदैव बनी रहेगी।—व्यापार में आने वाली बाधाओं और किसी प्रकार के विवाद को निपटाने के लिए घर में क्रिस्टल बॉल एवं पवन घंटियां लटकाएं।—घर में टूटे-फूटे बर्तन या टूटी खाट नहीं रखनी चाहिए। टूटे-फूटे बर्तन और टूटी खाट रखने से धन की हानि होती है।—घर के वास्तुदोष को दूर करने के लिए उत्तर दिशा में धातु का कछुआ और श्रीयंत्र युक्त पिरामिड स्थापित करना चाहिए, इससे घर में सुख-समृद्धि में वृद्धि होती है।—तीन या तीन से अधिक दरवाजे एक सीध में नही होने चाहिए।—-बीम के नीचे सिर करके न सोयें। पति पत्नि एक ही तकिए में सोयें।—-घर के मुख्य द्वार के सामने शौचघर, बाथरुम नही होना चाहिए।—-सीढ़ियाँ मुख्ये द्वार के सामने या आस पास नहीं होनी चाहिए।—-बीमारियों से बचाव के लिए उल्लू लॉकेट धारण करें।—-वंश बढ़ाने के लिए कछुए के उपर कछुआ।—-प्रगति के लिए चमत्काएरी लक्की कार्ड…—-भवन निर्माण में भारी धन खर्च करने के बावजूद भी सुख शांति नही।—-भवन निर्माण के उत्तम भूमि चेक करवाएँ।—-कक्षों के वास्तुत के विपरीत स्थिति से आपके परिवार में कलह तो नहीं।—-क्या आप बिना तोड़फोड़ किये भवन के वास्तुप दोषों को दूर करना चाहते हैं।—-क्या अपने शयन कक्ष और पूरे घर को फेंग शुई कराना चाहते हैं।—-24 घंटा मंत्र गुंजन यंत्र, इनमें गायत्री मंत्र, महामृत्युंतजय मंत्र, गणपति मंत्र, ओम नम: शिवाय मंत्र तथा दस मंत्र का गुजन यंत्र। इनके गुंजन से घर में पवित्रता आती है तथा यह सुख शांति, समृद्धि का प्रतीक है।—-मकान के पूर्व/पूर्वोत्तर दिशा में छोटे झाड़ीनुमा पौधे लगाएं। इससे मकान में रहने वाले परिवार को सूर्य के विकिरण के लाभ अधिकतम मिलते हैं।—–ओवरहेड टंकी दक्षिण-पश्चिम दिशा में बनायी जानी चाहिए।– —स्टडी टेबल के पास पेंडुलम घड़ी लगाने से ज्यादा ध्यान लगता है।—-बेड के ठीक सामने मीटर नहीं लगाना चाहिए।—–गर्भवती महिलाओं को दक्षिण पूर्व के कमरों में नहीं रहना चाहिए।– —सिर्फ वर्गाकार/आयताकार भूमि का टुकड़ा ही खरीदें।—-सभी कमरों के फर्नीचर पैटर्न को समय-समय पर बदलते भी रहें।– —-कीचन में नीले रंग का प्रयोग न करें।—-बेडरूम में पूजा का स्थान नहीं बनाएं।—-घर की भीतरी दीवार बिना कवर किया हुआ स्टोन नहीं होना चाहिए।—-स्टडी टेबल पर पानी का भरा गिलास रखने पर ध्यान अधिक लगता है।– —मकान के प्रवेश द्वार के पास कोई कांटेदार पौधा न लगाएं।—-सड़क के टी-प्वाइंट को फेस करते हुए मकान ठीक नहीं होते।– –खिड़कियां अधिकांशतः पूर्व/उत्तर की दीवारों पर बनानी चाहिए।– —मुख्य दरवाजे के खोलने बंद करने में कोई आवाज नहीं होनी चाहिए।—-कीचन में, कुकिंग गैस और वाशिंग सिंक के बीच ज्यादा-से-ज्यादा दूरी होनी चाहिए।—– पूजा उत्तर/पूर्व की ओर मुख करके करनी चाहिए।—घर में टूटा शीशा कतई न रहने दें।– —एक लाईन से तीन दरवाजे नहीं होने चाहिए।—–सीढ़ियां क्लॉक वाईज बनी होनी चाहिए और प्रत्येक समूह में सीढ़ियों की संख्या विषम होनी चाहिए।—–दरवाजों की संख्या सम-संख्या में जैसे 2,4,6,8 आदि होनी चाहिए।—–किसी भी फ्लैट में उत्तर और पूर्व की ओर छूटा हुआ स्थान दक्षिण और पश्चिम में छूटे हुए स्थान से अधिक होना चाहिए।—-उत्तर-पूर्व, पूर्व और उत्तर दिशा में बड़े पेड़ नहीं बल्कि झाड़ी लगानी चाहिए।—-मकान पर किसी भी पेड़ की छाया नहीं गिरनी चाहिए।– —भूमि का स्लोप पश्चिम से पूर्व या दक्षिण से उत्तर होनी चाहिए।—-घर के मुख्य द्वार पर शुभचिह्न अंकित करना चाहिए । इससे इस में सुख-समृद्धि बनी रहती है ।—-घर में पूजा स्थल में एक जटा वाला नारियल रखना चाहिए ।—-घर में सजावट में हाथी, रीछ, ऊँट को सजावटी खिलौने के रुप में उपयोग अशुभ होता है ।—-ऐसे शयनकक्ष जिनमें दम्पत्ति सोते हैं, वहाँ हंसों के जोड़े अथवा सारस के जोड़े के चित्र लगाना अति शुभ माना गया है । ये चित्र शयनकर्त्ताओं के सामने रहे इस तरह लगाना चाहिए ।—-घर के ईशान कोण पर कूड़ा-कर्कट भी इकठ्ठा न होने दें ।—-घर में देव स्थल पर अस्त्र-शस्त्रों को रखना अशुभ है ।— ईशान कोण यानि कि भवन का उत्तर-पूर्वी हिस्से वाला कॉर्नर पूजा स्थल होके पवित्रता का प्रतीक है, इसकिए यहाँ झाडू-पोचा, कुड़ादान नहीं रखना चाहिए ।— प्रातःकाल नाश्ते से पूर्व घर में झाडू अवश्य लगानी चाहिए ।— सन्ध्या समय जब दोनों समय मिलते हैं, घर में झाडू-पौंछे का काम नहीं करना चाहिए ।— घर में जूतों का स्थान प्रवेश द्वार के दाहिने तरफ न रखें ।— घर में टूटे दर्पण, टूटी टाँग का पाटा तथा किसी बन्द मशीन का रखा होना सुख समृद्धि की दृष्टि से अशुभ-कारक है ।— घर में तलघर में परिवार के किसी भी सदस्यों के फोटो न लगाएँ तथा वहाँ भगवान् और देवी-देवताओं की तस्वीरें या मूर्तियाँ भी न रखें ।— तीन व्यक्तियों का एक सीध में एकाकी फोटो हो, तो उसे घर में नहीं रखें और न ही ऐसे फोटो को कभी भी दीवार पर टाँगें ।— अगर दीवार पर कोई फोटो लगाना हो, तो उसके नीचे एक लकड़ी की पट्टी लगाएँ अर्थात् वह फोटो लकड़ी के पट्टे पर टिके, दीवार पर नहीं ।ये हें व्यापार के लिए वास्तु टिप्स–वास्तु शास्त्र के सिद्धांत सिर्फ घर पर ही नहीं बल्कि ऑफिस व दुकान पर भी लागू होते हैं। यदि दुकान या ऑफिस में वास्तु दोष हो तो व्यापार-व्यवसाय में सफलता नहीं मिलती। किस दिशा में बैठकर आप लेन-देन आदि कार्य करते हैं, इसका प्रभाव भी व्यापार में पड़ता है। यदि आप अपने व्यापार-व्यवसाय में सफलता पाना चाहते हैं नीचे लिखी वास्तु टिप्स का उपयोग करें-वास्तु शास्त्रियों के अनुसार चुंबकीय उत्तर क्षेत्र कुबेर का स्थान माना जाता है जो कि धन वृद्धि के लिए शुभ है। यदि कोई व्यापारिक वार्ता, परामर्श, लेन-देन या कोई बड़ा सौदा करें तो मुख उत्तर की ओर रखें। इससे व्यापार में काफी लाभ होता है। इसके पीछे वैज्ञानिक कारण भी है कि इस ओर चुंबकीय तरंगे विद्यमान रहती हैं जिससे मस्तिष्क की कोशिकाएं सक्रिय रहती हैं और शुद्ध वायु के कारण भी अधिक ऑक्सीजन मिलती है जो मस्तिष्क को सक्रिय करके स्मरण शक्ति बढ़ाती हैं। सक्रियता और स्मरण शक्ति व्यापारिक उन्नति और कार्यों को सफल करते हैं। व्यापारियों के लिए चाहिए कि वे जहां तक हो सके व्यापार आदि में उत्तर दिशा की ओर मुख रखें तथा कैश बॉक्स और महत्वपूर्ण कागज चैक-बुक आदि दाहिनी ओर रखें। इन उपायों से धन लाभ तो होता ही है साथ ही समाज में मान-प्रतिष्ठा भी बढ़ती है।इन वास्तु टिप्स से होगा मानसिक तनाव दूर—आजकल हर किसी की जिंदगी भागदौड़ से भरी है। हर कोई इस तरह अपने काम में लगा हुआ है कि मानसिक शांति तो बिल्कुल ही नहीं है। किसी के भी पास अपने आप के लिए वक्त ही नहीं है। अगर आप मानसिक तनाव से मुक्ति चाहते हैं तो नीचे लिखे वास्तु प्रयोग जरूर अपनाएं इनको अपनाने से आप खुद को सकारात्मक ऊर्जा से भरपूर महसूस करेंगे।– रात में झूठे बर्तन न रखें।– संध्या समय पर खाना न खाएं और नही स्नान करें।– शाम के समय घर में सुगंधित एवं पवित्र धुआ करें।– दिन में एक बार चांदी के गिलास का पानी पीएं।

Acharya M.K.Mishra

Ph.0124 2303769

Mb.9999282754

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